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समस्तीपुर मंडल कारा में बंदियों को मिलेगा नया जीवन, शुरू हुआ इलेक्ट्रीशियन प्रशिक्षण

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समस्तीपुर मंडल कारा में बंदियों के कौशल विकास और पुनर्वास के लिए इलेक्ट्रीशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ने की भी तैयारी है।

समस्तीपुर/आलम की खबर: बिहार के समस्तीपुर मंडल कारा में बंदियों के पुनर्वास और कौशल विकास को लेकर नई पहल शुरू की गई है। जेल प्रशासन की ओर से बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से इलेक्ट्रीशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। बुधवार को मंडल कारा परिसर में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जहां बंदियों के बीच काफी उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत जेल अधीक्षक प्रशांत कुमार ओझा ने की। उन्होंने कहा कि जेल केवल सजा काटने की जगह नहीं बल्कि सुधार और नए जीवन की शुरुआत का केंद्र भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा और रोजगारपरक प्रशिक्षण बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। जेल अधीक्षक ने कहा कि कई बार जेल से बाहर निकलने के बाद बंदियों को रोजगार नहीं मिल पाता, जिसके कारण वे फिर गलत रास्ते पर चले जाते हैं। ऐसे में यदि जेल के अंदर ही उन्हें कोई तकनीकी हुनर सिखाया जाए तो वे बाहर निकलकर सम्मानजनक रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत बंदियों को बिजली से जुड़े विभिन्न तकनीकी कार्यों की जानकारी दी जाएगी। इसमें घरेलू वायरिंग, बिजली उपकरणों की मरम्मत, सुरक्षा मानक और इलेक्ट्रिकल फिटिंग जैसी चीजें शामिल हैं। प्रशिक्षकों द्वारा व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि बंदी भविष्य में इसे रोजगार के रूप में अपना सकें। बताया गया कि इस कार्यक्रम का संचालन फंक्शनल वोकेशनल ट्रेनिंग एंड रिसर्च सोसाइटी, बेंगलुरु की ओर से किया जा रहा है। संस्था के क्षेत्र प्रभारी ज्ञान रोशन ने कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद बंदियों को रोजगार और नौकरी से जोड़ने में भी मदद की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान बंदियों के बीच कॉपी और पेन भी वितरित किए गए। जेल प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में अन्य रोजगारपरक कोर्स भी शुरू किए जा सकते हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पहल की सराहना की है। लोगों का कहना है कि यदि जेलों में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से चलाए जाएं तो अपराध की पुनरावृत्ति को काफी हद तक रोका जा सकता है। बिहार की जेलों में पिछले कुछ वर्षों से सुधारात्मक गतिविधियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बंदियों के लिए शिक्षा, योग, कौशल विकास और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि वे समाज में सकारात्मक बदलाव के साथ वापस लौट सकें। जेल प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण लेने वाले बंदियों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। कई बंदियों ने कहा कि यह प्रशिक्षण उनके भविष्य को नई दिशा देने में मदद करेगा। कार्यक्रम के दौरान उपाधीक्षक मनोज कुमार सिंह, सहायक अधीक्षक कंचन कुमारी समेत जेल प्रशासन के कई अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने इसे बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला कदम बताया। विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में तकनीकी कौशल की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में इलेक्ट्रीशियन प्रशिक्षण बंदियों के लिए बेहतर रोजगार विकल्प साबित हो सकता है। फिलहाल जेल प्रशासन इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटा हुआ है और आने वाले दिनों में अधिक बंदियों को इससे जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

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